Best Term Insurance Plans 2026: कम प्रीमियम में परिवार को दें ₹1 करोड़ से अधिक की वित्तीय सुरक्षा (Complete Guide)
क्या आपने कभी ठंडे दिमाग से सोचा है कि यदि कल सुबह आप दुनिया को अलविदा कह दें, तो आपके पीछे आपके परिवार का क्या होगा? आपके माता-पिता की दवाइयों का खर्च, पत्नी की जरूरतें, बच्चों के स्कूल की फीस, और आपके द्वारा लिए गए होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) कौन चुकाएगा?
ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं है, और यही कड़वा सच है। एक मध्यमवर्गीय परिवार को वित्तीय रूप से बर्बाद होने में सिर्फ एक अनहोनी की देर होती है। इसी अनहोनी के वित्तीय प्रभाव से आपके परिवार को बचाने का सबसे अचूक और सबसे सस्ता हथियार है—टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance)।
1. टर्म इंश्योरेंस क्या है? (What is Term Insurance?)

टर्म इंश्योरेंस लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) का सबसे शुद्ध, सरल और बुनियादी रूप है। इसे “Pure Protection Plan” भी कहा जाता है।
साधारण शब्दों में कहें तो, यह आपके और बीमा कंपनी के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट है। आप कंपनी को एक निश्चित समय (जैसे 20, 30 या 40 साल) के लिए हर साल या महीने एक छोटा सा शुल्क देते हैं, जिसे प्रीमियम (Premium) कहते हैं। इसके बदले में, यदि उस अवधि (Term) के दौरान आपकी मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी आपके नामांकित व्यक्ति (Nominee) को एक बहुत बड़ी राशि देती है, जिसे सम एश्योर्ड (Sum Assured) या बीमा राशि कहते हैं।
टर्म इंश्योरेंस का मूल सिद्धांत:
टर्म इंश्योरेंस केवल ‘जोखिम सुरक्षा’ के सिद्धांत पर काम करता है। इसमें कोई निवेश या रिटर्न का तत्व (साधारण प्लान में) शामिल नहीं होता। इसका एकमात्र उद्देश्य पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद उसके आश्रितों को वित्तीय संकट से बचाना है।
2. टर्म इंश्योरेंस कैसे काम करता है? एक वास्तविक उदाहरण
इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए हम अमित का उदाहरण लेते हैं:
उदाहरण: अमित की उम्र 28 वर्ष है और वह एक आईटी कंपनी में काम करता है। उसकी सालाना आय ₹10 लाख है। अमित ने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए 40 वर्ष की अवधि (यानी 68 वर्ष की उम्र तक) के लिए ₹1 करोड़ का टर्म इंश्योरेंस प्लान लिया। इसके लिए वह हर साल लगभग ₹10,000 का प्रीमियम चुकाता है।
- स्थिति ए (यदि अमित के साथ अनहोनी होती है): मान लीजिए पॉलिसी लेने के 12 साल बाद (40 वर्ष की उम्र में) अमित की एक दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है। इस स्थिति में, बीमा कंपनी अमित की पत्नी (नॉमिनी) को तुरंत ₹1 करोड़ की पूरी राशि टैक्स-फ्री देगी। इस पैसे से उसकी पत्नी अपना घर चला सकती है, बच्चों की पढ़ाई पूरी करा सकती है।
- स्थिति बी (यदि अमित सुरक्षित रहता है): यदि अमित 68 वर्ष की उम्र तक पूरी तरह स्वस्थ और जीवित रहता है, तो पॉलिसी समाप्त हो जाएगी। साधारण टर्म प्लान होने के कारण, अमित को मैच्योरिटी पर कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा।
कई लोग ‘स्थिति बी’ को देखकर सोचते हैं कि पैसा डूब गया, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। आपने जो प्रीमियम दिया, वह उस 40 साल के दौरान मिले “मानसिक सुकून” (Peace of Mind) और सुरक्षा की कीमत थी।
3. टर्म इंश्योरेंस और पारंपरिक एंडोमेंट प्लान में अंतर
भारतीयों में अक्सर एक आदत होती है कि वे बीमा को निवेश (Investment) के साथ मिला देते हैं। लोग एलआईसी (LIC) के पारंपरिक एंडोमेंट प्लान, मनी-बैक प्लान या युलिप (ULIP) में पैसा लगाते हैं, जहाँ उन्हें लगता है कि पैसा वापस मिलेगा। आइए देखते हैं कि टर्म इंश्योरेंस इनसे क्यों बेहतर है:
| विशेषता (Features) | शुद्ध टर्म इंश्योरेंस (Pure Term Plan) | पारंपरिक एंडोमेंट / मनी-बैक प्लान |
| मुख्य उद्देश्य | केवल शुद्ध जीवन सुरक्षा (Pure Protection) | जीवन सुरक्षा + बचत/निवेश दोनों |
| प्रीमियम (Premium) | बहुत ही कम (₹1 करोड़ के लिए ₹8,000 – ₹12,000 सालाना) | बहुत अधिक (₹10 लाख के कवर के लिए ₹30,000 – ₹40,000 सालाना) |
| बीमा राशि (Cover) | बहुत बड़ी राशि (₹1 करोड़ या अधिक) | बहुत छोटी राशि (आमतौर पर ₹5 लाख से ₹15 लाख) |
| मैच्योरिटी रिटर्न | कुछ भी नहीं (साधारण प्लान में) | बोनस के साथ निवेशित राशि वापस मिलती है |
| रिटर्न की दर (ROI) | लागू नहीं | बहुत कम (लगभग 4% से 6% सालाना) |
स्पष्ट निष्कर्ष: यदि आप ₹1 करोड़ का पारंपरिक प्लान लेने जाएंगे, तो आपको साल का ₹3 से ₹4 लाख प्रीमियम देना होगा, जो एक आम आदमी के बजट के बाहर है। इसलिए, बीमा को बीमा की तरह लें और निवेश के लिए म्यूचुअल फंड (PPF, SIP) चुनें।
4. आपको टर्म इंश्योरेंस क्यों लेना चाहिए? (Top Benefits)
अगर आप अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं (Sole Breadwinner), तो टर्म प्लान आपके लिए कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। इसके प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:
क. बेहद किफायती प्रीमियम (Extremely Affordable)
यह वित्तीय जगत का एकमात्र ऐसा टूल है जहां आप बहुत कम पैसे देकर एक विशाल फंड तैयार कर सकते हैं। ₹25 से ₹30 प्रतिदिन के खर्च पर ₹1 करोड़ का कवर मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
ख. वित्तीय सुरक्षा का विशाल दायरा (Financial Cushion)
जब घर के कमाने वाले की मृत्यु होती है, तो दुखों का पहाड़ तो टूटता ही है, साथ ही किराना, बिजली बिल, स्कूल की फीस जैसे रोज़मर्रा के खर्च परिवार को तोड़ देते हैं। टर्म इंश्योरेंस का पैसा इस मुश्किल वक्त में परिवार को सड़क पर आने से बचाता है।
ग. लोन और कर्जों से मुक्ति (Debt Protection)
आजकल हर दूसरा व्यक्ति होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन की ईएमआई पर जी रहा है। यदि आपके साथ कुछ गलत होता है, तो बैंक आपके परिवार से घर या गाड़ी छीन सकते हैं। टर्म इंश्योरेंस की राशि से आपके पीछे आपका परिवार सारे कर्ज एक झटके में चुका सकता है।
घ. टैक्स में दोहरी छूट (Double Tax Benefits)
- धारा 80C: टर्म इंश्योरेंस के लिए चुकाए जाने वाले प्रीमियम पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत प्रतिवर्ष ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है।
- धारा 10(10D): मृत्यु के बाद आपके नॉमिनी को मिलने वाली पूरी सम एश्योर्ड (बीमा राशि) पूरी तरह से टैक्स-फ्री होती है।
ङ. फ्लेक्सिबल पेआउट विकल्प (Flexible Payouts)
आधुनिक टर्म प्लान आपके नॉमिनी को पैसे लेने के कई विकल्प देते हैं:
- Lump Sum: पूरा पैसा एक साथ (जैसे पूरे ₹1 करोड़ एक बार में)।
- Monthly Income: कुछ पैसा एक साथ और बाकी का पैसा अगले 10-15 सालों तक हर महीने सैलरी की तरह। यह उन परिवारों के लिए बेस्ट है जिन्हें बड़ा फंड मैनेज करना नहीं आता।
5. टर्म इंश्योरेंस के विभिन्न प्रकार (Types of Term Plans)
समय के साथ बीमा कंपनियों ने ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से टर्म प्लान में कई बदलाव किए हैं। वर्तमान में बाजार में मुख्य रूप से ये प्रकार उपलब्ध हैं:
1. लेवल टर्म एश्योरेंस (Level Term Assurance)
यह सबसे बुनियादी और लोकप्रिय प्लान है। इसमें आपके द्वारा चुना गया लाइफ कवर (Sum Assured) और प्रीमियम पूरी पॉलिसी अवधि के दौरान बिल्कुल समान (Level) रहता है। यदि आपने 1 करोड़ का प्लान लिया है, तो पहले साल भी कवर 1 करोड़ रहेगा और 30वें साल भी।
2. रिटर्न ऑफ प्रीमियम टर्म प्लान (TROP – Term Return of Premium)
भारतीयों की “पैसा वापसी” की मानसिकता को देखते हुए यह प्लान बनाया गया है। इसमें यदि पॉलिसीधारक पॉलिसी अवधि के अंत तक जीवित रहता है, तो कंपनी उसके द्वारा चुकाया गया सारा प्रीमियम (जीएसटी को छोड़कर) वापस कर देती है।
- नुकसान: इसका प्रीमियम साधारण टर्म प्लान की तुलना में 2 से 3 गुना महंगा होता है। वित्तीय सलाहकार इसे लेने की सलाह नहीं देते, क्योंकि इससे अच्छा है कि आप साधारण टर्म प्लान लें और बचे हुए पैसे को इंडेक्स म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर दें।
3. इंक्रीजिंग टर्म इंश्योरेंस (Increasing Term Insurance)
जैसे-जैसे समय बदलता है, महंगाई (Inflation) बढ़ती जाती है। आज जो वैल्यू ₹1 करोड़ की है, वो 20 साल बाद नहीं होगी। इस प्लान में आपका लाइफ कवर हर साल एक निश्चित दर से (जैसे 5% या 10%) बढ़ता जाता है, जबकि प्रीमियम फिक्स रहता है। यह बढ़ती जिम्मेदारियों (शादी, बच्चे) के लिए बेहतरीन है।
4. डिक्रीजिंग टर्म इंश्योरेंस (Decreasing Term Insurance / Credit Life)
इसमें समय के साथ आपका लाइफ कवर घटता जाता है। इसका उपयोग आमतौर पर बड़े लोन (जैसे होम लोन) को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे आपका लोन कम होता जाता है, आपका इंश्योरेंस कवर भी उसी अनुपात में घटता जाता है।
6. राइडर्स क्या हैं? अपनी पॉलिसी को 10 गुना मजबूत बनाएं
साधारण टर्म प्लान को और अधिक शक्तिशाली और व्यापक बनाने के लिए बीमा कंपनियां राइडर्स (Riders) की सुविधा देती हैं। राइडर्स एक तरह के ‘ऐड-ऑन’ या एक्स्ट्रा फीचर्स होते हैं, जिन्हें आप थोड़ा सा अतिरिक्त प्रीमियम देकर अपनी मूल पॉलिसी में जोड़ सकते हैं।
प्रमुख और उपयोगी राइडर्स निम्नलिखित हैं:
क. क्रिटिकल इलनेस राइडर (Critical Illness Rider) ⭐⭐⭐⭐⭐
यह सबसे महत्वपूर्ण राइडर है। यदि पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक को कैंसर, हार्ट अटैक, किडनी फेलियर या पैरालिसिस जैसी 30-40 गंभीर बीमारियों में से कोई एक हो जाती है, तो बीमा कंपनी तुरंत एक तय रकम (जैसे ₹10 या ₹20 लाख) एकमुश्त दे देती है। इस पैसे का उपयोग इलाज के लिए या नौकरी छूटने पर घर चलाने के लिए किया जा सकता है।
ख. एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट राइडर (Accidental Death Benefit Rider)
यदि पॉलिसीधारक की मृत्यु किसी दुर्घटना (Accident) के कारण होती है, तो उसके नॉमिनी को बेस कवर के अलावा राइडर की अतिरिक्त राशि भी मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि ₹1 करोड़ का बेस प्लान है और ₹20 लाख का एक्सीडेंटल राइडर है, तो दुर्घटना में मृत्यु होने पर कुल ₹1.20 करोड़ मिलेंगे।
ग. वेवर ऑफ प्रीमियम राइडर (Waiver of Premium Rider)
यदि किसी भयानक दुर्घटना के कारण पॉलिसीधारक पूरी तरह से विकलांग (Permanent Disability) हो जाता है और कमाने की स्थिति में नहीं रहता, तो इस राइडर के तहत उसके भविष्य के सारे प्रीमियम पूरी तरह माफ कर दिए जाते हैं, लेकिन उसकी पॉलिसी और लाइफ कवर पहले की तरह ही सक्रिय रहता है।
7. आपको कितने का टर्म इंश्योरेंस लेना चाहिए? (HLV का नियम)
एक सबसे बड़ा सवाल जो हर किसी के मन में आता है—”मुझे कितने करोड़ का बीमा लेना चाहिए?” बहुत से लोग बिना सोचे-समझे ₹50 लाख या ₹1 करोड़ का प्लान ले लेते हैं।
बीमा की सही राशि तय करने का एक मानक नियम है—Human Life Value (HLV) Rule।
थंब रूल (Thumb Rule):
आपका कुल लाइफ कवर = आपकी वार्षिक आय (Annual Income) का कम से कम 15 से 20 गुना।
- यदि आपकी सालाना कमाई ₹5 लाख है, तो आपका कवर कम से कम ₹75 लाख से ₹1 करोड़ होना चाहिए।
- यदि आपकी सालाना कमाई ₹10 लाख है, तो आपका कवर कम से कम ₹1.5 करोड़ से ₹2 करोड़ होना चाहिए।
सटीक गणना के लिए यह फॉर्मूला अपनाएं:
$$\text{आवश्यक लाइफ कवर} = (\text{वार्षिक खर्च} \times 20) + \text{आपके सारे कर्ज/लोन} + \text{भविष्य के लक्ष्य (बच्चों की उच्च शिक्षा/शादी)} – \text{आपकी वर्तमान बचत/निवेश}$$
इस फॉर्मूले से जो भी नंबर निकल कर आए, उतने का ही टर्म प्लान लें ताकि महंगाई के दौर में भी आपके परिवार को कोई कमी न खले।
8. बेस्ट टर्म इंश्योरेंस कंपनी चुनते समय इन 4 बातों का ध्यान रखें
भारत में 24 से अधिक लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां हैं। विज्ञापनों के बहकावे में आकर किसी भी कंपनी से पॉलिसी न लें। हमेशा निम्नलिखित 4 मापदंडों (Metrics) की जांच करें, जिनका डेटा हर साल IRDAI (बीमा नियामक) अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी करता है:
1. क्लेम सेटलमेंट रेशियो (Claim Settlement Ratio – CSR)
यह सबसे महत्वपूर्ण नंबर है। CSR का मतलब है कि अगर किसी कंपनी के पास 100 क्लेम आए, तो उसने उनमें से कितने क्लेम का पैसा पास किया (भुगतान किया)।
- टिप: हमेशा उसी कंपनी को चुनें जिसका CSR 98% से अधिक हो। इसका मतलब है कि कंपनी क्लेम देने के मामले में बेहद ईमानदार और भरोसेमंद है।
2. क्लेम रिजेक्शन रेशियो (Claim Rejection Ratio)
100 में से कंपनी ने कितने क्लेम्स को खारिज (Reject) कर दिया। यह रेशियो जितना कम होगा (आदर्श रूप से 1% से कम), कंपनी उतनी ही बेहतर मानी जाएगी।
3. अमाउंट सेटलमेंट रेशियो (Amount Settlement Ratio)
कई बार कंपनियां छोटे-छोटे क्लेम (जैसे ₹2 लाख, ₹5 लाख) तो पास कर देती हैं, लेकिन जब ₹1 करोड़ या ₹2 करोड़ का बड़ा क्लेम आता है, तो उसे रिजेक्ट करने के बहाने ढूंढती हैं। अमाउंट सेटलमेंट रेशियो आपको बताता है कि कंपनी ने कुल क्लेम की गई ‘राशि’ का कितना प्रतिशत भुगतान किया। यह भी 95% से ऊपर होना चाहिए।
4. सॉल्वेंसी रेशियो (Solvency Ratio)
यह दर्शाता है कि यदि देश में कोई बड़ी आपदा आ जाए और बहुत सारे लोग एक साथ क्लेम कर दें, तो क्या कंपनी के पास इतना पैसा है कि वह दिवालिया हुए बिना सबका भुगतान कर सके? IRDAI के नियम के अनुसार, हर कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो 1.5 (या 150%) से अधिक होना अनिवार्य है।
9. भारत की टॉप टर्म इंश्योरेंस कंपनियां (Top 5 Companies in India)
IRDAI के हालिया आंकड़ों और मार्केट इमेज के आधार पर, भारत की कुछ सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय टर्म इंश्योरेंस कंपनियां और उनके प्रमुख प्लान्स नीचे दिए गए हैं:
- HDFC Life Insurance (Plan: HDFC Life Click 2 Protect Super)
- इनका क्लेम सेटलमेंट रेशियो और ब्रांड वैल्यू भारत में सबसे बेहतरीन मानी जाती है। इसमें कस्टमाइजेशन के बहुत सारे विकल्प मिलते हैं।
- Max Life Insurance (Plan: Max Life Smart Secure Plus)
- इनका अमाउंट सेटलमेंट रेशियो और कस्टमर सपोर्ट बेहद शानदार है। यह कंपनी क्लेम के त्वरित निपटारे के लिए जानी जाती है।
- ICICI Prudential Life Insurance (Plan: ICICI Pru iProtect Smart)
- इस प्लान में क्रिटिकल इलनेस और इन-बिल्ट एक्सीडेंटल कवर के बेहतरीन कॉम्बिनेशन मिलते हैं।
- Tata AIA Life Insurance (Plan: Tata AIA Sampoorna Raksha Supreme)
- इनका सॉल्वेंसी रेशियो और क्लेम पास करने की स्पीड काफी अच्छी है।
- LIC of India (Plan: LIC Tech Term / DigiTerm)
- भारत की सबसे पुरानी और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी। हालांकि इनका प्रीमियम प्राइवेट कंपनियों से थोड़ा महंगा होता है, लेकिन ‘भरोसे’ के मामले में लोग आज भी इसे पसंद करते हैं।
10. टर्म इंश्योरेंस खरीदते समय कभी न करें ये 5 गलतियां (⚠️ बेहद जरूरी)
यदि आप टर्म प्लान लेते समय नीचे दी गई गलतियां करते हैं, तो याद रखिए कि आपके न रहने पर बीमा कंपनी आपके परिवार का क्लेम रिजेक्ट (Reject) कर देगी, और आपके प्रीमियम के पैसे भी बर्बाद हो जाएंगे।
गलती #1: मेडिकल हिस्ट्री और आदतों को छुपाना (Hiding Information)
यदि आप धूम्रपान (Smoking) करते हैं, गुटखा खाते हैं या शराब पीते हैं, तो पॉलिसी फॉर्म में इसे स्पष्ट रूप से ‘Yes’ टिक करें। हां, ऐसा करने से आपका प्रीमियम 20-30% बढ़ जाएगा, लेकिन क्लेम पास होने की गारंटी 100% रहेगी। यदि आपने छुपाया और मृत्यु के बाद मेडिकल जांच में यह बात सामने आई, तो कंपनी एक रुपया भी नहीं देगी।
गलती #2: पॉलिसी लेने में देरी करना (Delaying Policy)
टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम आपकी उम्र (Age) पर निर्भर करता है।
- यदि आप 25 वर्ष की उम्र में ₹1 करोड़ का कवर लेते हैं, तो प्रीमियम करीब ₹8,000 सालाना होगा।
- यदि आप यही कवर 35 वर्ष की उम्र में लेंगे, तो प्रीमियम ₹15,000 से अधिक हो जाएगा।एक बार जो प्रीमियम लॉक हो जाता है, वह पूरी जिंदगी वही रहता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके, पॉलिसी लें।
गलती #3: गलत पॉलिसी टर्म (अवधि) चुनना
कई लोग सोचते हैं कि वे 80 या 85 साल की उम्र तक का टर्म प्लान ले लें। लेकिन याद रखिए, टर्म इंश्योरेंस का उद्देश्य केवल तब तक सुरक्षा देना है जब तक आप कमाने वाले सदस्य हैं। आमतौर पर 60 या 65 वर्ष की उम्र के बाद आपके बच्चे आत्मनिर्भर हो जाते हैं और आपके ऊपर कोई कर्ज नहीं रहता। इसलिए 60 से 65 वर्ष तक का ही टर्म चुनें, फालतू में 85 साल तक का प्रीमियम न भरें।
गलती #4: ‘MWP Act’ को नजरअंदाज करना
यदि आपने कोई बड़ा बिजनेस लोन या होम लोन लिया है, तो टर्म इंश्योरेंस लेते समय उसे Married Women’s Property Act (MWP Act), 1874 के तहत रजिस्टर करें। इसका फायदा यह है कि आपके न रहने पर इंश्योरेंस के पैसे पर केवल आपकी पत्नी और बच्चों का अधिकार होगा। आपके लेनदार (कर्जदाता या बैंक) उस पैसे को कुर्क या जब्त नहीं कर सकते।
11. स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस कैसे खरीदें?
ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस खरीदना ऑफलाइन (एजेंट के जरिए) खरीदने की तुलना में 15% से 25% तक सस्ता होता है, क्योंकि इसमें एजेंट का कमीशन खत्म हो जाता है। ऑनलाइन खरीदने की प्रक्रिया बेहद आसान है:
निष्कर्ष (Conclusion)
टर्म इंश्योरेंस कोई निवेश नहीं है जिससे आप अमीर बनेंगे, बल्कि यह एक सुरक्षा कवच है जिससे आपका परिवार कभी गरीब नहीं होगा।
यह आपके परिवार के प्रति आपके सच्चे प्यार और जिम्मेदारी का प्रमाण है। यदि आप 2026 में अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने की योजना बना रहे हैं, तो किसी भी म्यूचुअल फंड, स्टॉक या एफडी (FD) में पैसा लगाने से पहले, आज ही अपने लिए एक बेहतरीन टर्म इंश्योरेंस प्लान चुनें।
टर्म इंश्योरेंस से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्र. क्या टर्म इंश्योरेंस में मैच्योरिटी पर पैसा वापस मिलता है?
उ. साधारण (Pure) टर्म इंश्योरेंस में मैच्योरिटी पर कोई पैसा वापस नहीं मिलता है। लेकिन अगर आप Return of Premium (TROP) प्लान चुनते हैं, तो पॉलिसी अवधि खत्म होने पर आपका पूरा प्रीमियम वापस मिल जाता है, हालांकि इसका प्रीमियम काफी महंगा होता है।
प्र. क्या धूम्रपान (Smoking) करने वालों को टर्म प्लान मिल सकता है?
उ. हाँ, बिल्कुल मिल सकता है। लेकिन धूम्रपान न करने वाले (Non-Smokers) की तुलना में इनका प्रीमियम थोड़ा अधिक होता है। खरीदते समय फॉर्म में ‘Smoker’ विकल्प को चुनना अनिवार्य है।
प्र. यदि बीमा कंपनी भविष्य में बंद हो गई या दिवालिया हो गई तो क्या होगा?
उ. भारत में सभी बीमा कंपनियां IRDAI (Government Body) के कड़े नियमों के तहत काम करती हैं। किसी भी कंपनी के डूबने पर IRDAI उसके ग्राहकों और बिजनेस को किसी दूसरी बड़ी बीमा कंपनी (जैसे LIC या अन्य बड़ी बैंक-समर्थित कंपनी) को ट्रांसफर कर देता है। इसलिए आपका पैसा और रिस्क पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
प्र. क्या मैं एक से अधिक कंपनियों से टर्म इंश्योरेंस ले सकता हूँ?
उ. हाँ, आप दो या दो से अधिक अलग-अलग कंपनियों से भी टर्म इंश्योरेंस ले सकते हैं। बशर्ते आपको नई पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी चल रही पॉलिसियों की जानकारी फॉर्म में देनी होगी। इसे ‘मल्टीपल क्लेम’ के समय सहूलियत के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
























